मेरा पक्ष
नीरज कुमार झा
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शनिवार, 23 अक्टूबर 2010
महान
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जो आज बड़े माने जाते हैं उनसे मुझे परहेज है महान तो दूर मैं उन्हें बड़ा भी नहीं मानता हूँ उदाहरण के लिये पर्दे की दुनियॉ वाले मेरे लिए कोई...
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गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010
भारती का भविष्य (भाग १)
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भारती से यहॉ आशय हिन्दी भाषा से है। इस भाषा को व्यापक बनाने तथा राष्ट्रीय स्तर पर इसकी स्वीकार्यता को बढ़ाने के लिये भारती नाम का प्रयोग ही...
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रविवार, 17 अक्टूबर 2010
चिट्ठाकारी : परिवर्तन का महती मंच
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ब्लॉगिंग या चिट्ठाकारी सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा प्रदत्त ऐसा मंच है जो देश और दुनियाँ को बदलने की अभूतपूर्व क्षमता रखता है. यह बिलकुल सहज...
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रविवार, 10 अक्टूबर 2010
क्यों नहीं ....
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कर्ज है हमारे ऊपर पुरानी पीढ़ियों का। अधिकतर पीढ़ियों ने दी है बेहतर दुनियाँ आने वाली पीढ़ियों को। गौर करें हम भी ...
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शनिवार, 9 अक्टूबर 2010
बिहार में चुनाव
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पांच साल पहले बिहार को डेढ़ दशकों के अंधकार युग से छुटकारा मिला था. अब पुनः बिहार के समक्ष परीक्षा की घड़ी आ गयी है. इन पांच वर्षों में ...
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सोमवार, 4 अक्टूबर 2010
सेकुलरवाद का संकट
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नीरज कुमार झा धर्म धृ धातु से बना है जिसका अर्थ होता है धारण करना और रिलिजन लैटिन रेलिगेअर से उत्पन्न शब्द है जिसका अर्थ है चीजों को...
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रविवार, 12 सितंबर 2010
देवी हिन्दी की जय हो
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हिन्दी देवी हैं हिन्दी के पुजारी हैं विशेष पुरोहित हैं वर्ष में निर्दिष्ट समय पर जैसी जिसकी श्रद्धा हो द...
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