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नीरज कुमार झा
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कल्पना का सच(कविता)
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कल्पना का सच(कविता)
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शनिवार, 5 फ़रवरी 2011
कल्पना का सच
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अस्तित्व का अर्थ समझना संभव नहीं, यह तय है। अस्तित्व का कोई सत्य नहीं, यह विचित्र सत्य है। अर्थहीनता के इस अनादि अनंत विस्तार में व...
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