मेरा पक्ष
नीरज कुमार झा
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ताबूत में पड़े मुर्दे की तरह (कविता)
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ताबूत में पड़े मुर्दे की तरह (कविता)
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रविवार, 29 अगस्त 2010
ताबूत में पड़े मुर्दे की तरह
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अकारण ही मुझे मिला है बहुत सारा मेरी प्रतिभा और प्रयासों से कहीं बहुत ज़्यादा अपने-आप जो आया डरता हूँ कहीं चला न जाए ऐसे ही आँखें रखता ...
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