मेरा पक्ष
नीरज कुमार झा
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Hindi Poem. Niraj Kumar Jha
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सोमवार, 30 दिसंबर 2024
परख
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बुद्धि ही है किसी की जहाँ ठहर जाता है लोगों का बोध कल्पना ही है किसी की जो करता है लोगों की कल्पनाओं पर राज लोग बताते हैं मिट्टी, पानी और ह...
मंगलवार, 28 अगस्त 2018
The ever evolving existent future
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Civilisation, they say, manifests pastism. But let me say this, Civilisation remains ever, A subject of futurism. Pastism is only, And only...
शुक्रवार, 20 मार्च 2015
तुम ही ज्ञान हो तुम ही अंधकार हो
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कोई इतना भी बड़ा नहीं हो सकता कि तुमसे बड़ा हो जाए कोई इतना भी छोटा नहीं हो सकता कि तुमसे छोटा हो जाए तुम नहीं जानते कि तुम क्या हो तुम...
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