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सोमवार, 30 दिसंबर 2024

परख

बुद्धि ही है किसी की 
जहाँ ठहर जाता है
लोगों का बोध
कल्पना ही है किसी की
जो करता है
लोगों की कल्पनाओं पर राज
लोग बताते हैं
मिट्टी, पानी और हवा का
अच्छा या बुरा होना
जिनकी वजह से वे हैं
अधिकतर नहीं परख पाते उन्हें
जो उनकी वजह से हैं

नीरज कुमार झा

मंगलवार, 28 अगस्त 2018

The ever evolving existent future

Civilisation, they say,
manifests pastism.
But let me say this,
Civilisation remains ever,
A subject of futurism.
Pastism is only,
And only, barbarism.
We can say this
With deserving pride
That we have ever been only becoming.
And we have never been the past, thereby.
And we have 
always been existing as future,
The ever evolving existent future.

Niraj Kumar Jha

शुक्रवार, 20 मार्च 2015

तुम ही ज्ञान हो तुम ही अंधकार हो

कोई इतना भी बड़ा नहीं हो सकता
कि तुमसे बड़ा हो जाए
कोई इतना भी छोटा नहीं हो सकता
कि तुमसे छोटा हो जाए
तुम नहीं जानते कि तुम क्या हो
तुम सब कुछ हो
और तुम कुछ भी नहीं हो
तुम ही ब्रह्माण्ड हो
तुम ही हो कण लघु
तुम ही आदि हो
तुम ही अनादि हो
तुम अंत हो
तुम ही अनंत हो
तुम ही सीमा तुम ही असीम हो
तुम ही आकार तुम ही निराकार हो
तुम ही भंगुर तुम ही सनातन हो
अस्तित्व का यह अगम अगोचर अज्ञेय विस्तार
है तुम्हारा ही विराट रूप
यह सृष्टि भी तुम ही हो
तुम्हारे ही साथ यह उत्पन्न
और तुम्हारे साथ ही हो जाएगी यह नष्ट
तुम नष्ट भी नहीं होते
तुम अजन्मा भी हो
इसलिए यह सब कुछ भी वैसा ही है
नश्वर ही शाश्वत है
शाश्वत ही नश्वर है
तुम नश्वरता में हो शाश्वत
और हो शाश्वत नश्वर भी
तुम सब कुछ समझते भी हो
और कुछ भी नहीं समझते
तुम ही ज्ञान हो तुम ही अंधकार हो

- नीरज कुमार झा