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मंगलवार, 28 मार्च 2023

पूँजीवाद

जमे पूँजीपतियों को पूँजीवाद रास नहीं आता है। प्रतियोगिता और मुक्त बाजार उन्हें पीड़ित करता है। पूँजीवाद दरससल आकांक्षी पूँजीपतियों और पूँजीपोषितों के हित का साधन है। 

नीरज कुमार झा