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रविवार, 14 जुलाई 2024

अनादि से अनंत

रास्ता ही है 
मंजिल नहीं है
लगी है भीड़ फिर भी
मार्गदर्शकों की

चलना ही है
पहुँचना नहीं है कहीं
अबूझ है 
पथप्रदर्शकी 

नीरज कुमार झा

बुधवार, 23 फ़रवरी 2022

रास्ता पकड़ो

रास्ता पकड़ो 

और सुनो रास्ते का कहना 

यह बताता है सच का मतलब 

और मतलब का सच 

अहम्  यही है पैरों के नीचे 

और कहीं भ्रम अधिक है

नहीं है यह स्थिर और न ही मूक 

यह बताता है और ले जाता है  

वहाँ जो तुम्हारा है  गंतव्य है उचित 


नीरज कुमार झा