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मंगलवार, 5 मई 2026

शब्दों की प्राण-रक्षा

हर शब्द प्रयत्न है,
अर्थ उसका जीवन है।
निष्प्राण न हों शब्द,
शब्दों को सींचना होता है।
सूखे-गिरे बिखरे शब्दों के ऊपर,
जीवन दुष्कर हो जाता है।

नीरज कुमार झा