नीरज कुमार झा
गुरुवार, 9 अप्रैल 2026
वैश्विक वैचारिक तन्तुजाल
वैश्विक संगठित शक्तियों का वर्चस्व, दमन और दोहन जिन तंत्रों पर टिका है, उनका पोषण करने वाला वैचारिक तंतु-जाल सामान्य व्यक्तियों की मानसिकता में आविष्ट होकर क्रियाशील रहता है। स्वयं को निरीह मानकर आरोपित आचरण का स्वाभाविक रूप से पालन करने वाले व्यक्तियों का समूह ही अंततः उस व्यवस्था का यौगिक अवयव बन जाता है। यह तंत्र इतना सूक्ष्म रूप से कार्य करता है कि वही निर्धारित करता है कि सामान्य व्यक्ति किन व्यक्ति-भूमिकाओं, दृश्यों और वस्तुओं की सराहना करे और किनका तिरस्कार। स्वयं, स्वजनों और समस्थित व्यक्तियों के प्रति तिरस्कार इस पराजयी प्रवृत्ति का प्राथमिक लक्षण है।
नीरज कुमार झा
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