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नीरज कुमार झा
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गुरुवार, 4 अप्रैल 2024
देख तू आकाश
अंधकार
अंतस का
सर चढ़ता
बन अहंकार
ढोता दंभी नित
स्वयं का बोझ
जहाँ पहुँचता
बन जाता
औरों का भार
कह सको तो
कहो उन्हें
देखो तुम धरती
देख तू आकाश
नीरज कुमार झा
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