उनसे मुझे परहेज है
महान तो दूर
मैं उन्हें बड़ा भी नहीं मानता हूँ
उदाहरण के लिये पर्दे की दुनियॉ वाले
मेरे लिए कोई मायने नहीं रखते
पर्दे पर दिखने वाले फसाने
मुझे नहीं लुभाते
समाज को देखने के लिए
मेरे पास हैं बेहतर माध्यम
और मनोरंजन के लिए है
मेरा स्वयं का कल्पना संसार
और मेरे मन का पटल
दूसरे की कल्पना खरीदने की नहीं मुझे दरकार
नकल की कला में कोई कितना भी रखे महारत
खोटा सिक्का जैसे सबके लिए
वैसे ही मेरे लिए लोग नक़ल की दुनियाँ के
महान मानना ही हो तो मैं मानूंगा
नुक्कड़ों पर नाटक खेलने वाले को
या दूसरे तमाशेबाजों को
जो हमारी तालियों पर
कृतज्ञता से हैं सर झुकाते
खिलाड़ियों को फिर भी मैं मानता महान
गेंदों, बल्लों आदि के करतब
कूद-फांद की असाधारण क्षमता
की करता मैं भी सराहना
लेकिन उनकी महानता क्षुद्र है मेरे लिए
जलती धूप और जमा देने वाली ठंड में
काम करने वाले मजदूरों की महानता के सामने
घर-घर में काम करने वाली महिलाएँ
सड़कों और भूमिगत नालों को साफ करने वाले कर्मी
मन से रूग्णों की सेवा करने वाली अस्पतालों की बहनें
असली सम्मान के अधिकारी हैं मेरे लिए
मुझे नहीं शक
स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों की महानता पर
उनका त्याग और बलिदान है स्तुत्य
उनका साहस है प्रणम्य
जान को हथेली पर रख कर लड़ने वाले वीर सिपाही
उनके बड़प्पन पर हो नहीं सकता किसी को ऐतराज
लेकिन नहीं किसी तरह से महान
मेरे लिए राजनेता और अधिकारी
उनमें भी हैं मानवता के सेवी
हो सम्मान उनका
काम करने के लिये बनकर अपवाद
मैं भी मानता हूँ
लेकिन एक तो सेवा ही है उनका रोजगार
और दूसरा शोहरत, ईज्जत और सुविधाएँ जो उन्हें मिलती हैं
उन्हें नहीं रहने देती महान
मेरी नजरों में
जान को खतरे में डालकर सच के लिए लड़ने वाले समाजसेवी व पत्रकार
और स्वहित को छोड़कर समाजहित में सोचने वाले सुधी
निश्चित रूप से हैं महान मेरे लिए
महान लेकिन महान नहीं शुमार होने वाले और भी हैं
महान नहीं लेकिन महान शुमार होने वाले और भी कई हैं
लेकिन मैं अंत करता हूँ नमन करके
मित्रता की उस नि:स्वार्थ भावना को
जो महान बनाती मेरे मित्रों को
मेरी नजरों में
- नीरज कुमार झा