पृष्ठ

बुद्धिवृत्तिक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बुद्धिवृत्तिक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2024

कल्याण सूत्र

राष्ट्रों की सुख-समृद्धि का यत्न वास्तव में एक निरंतर चलाने वाला युद्ध है। सुख-समृद्धि की दशा में यथास्थिति का विकल्प नहीं होता; विकास के लिए सक्रिय रहना होता है अथवा ह्रास की पीड़ा में तड़पना पड़ता है। अनेक बुद्धिवृत्तिक मस्तिष्क के प्रयोग में प्रमाद के कारण राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को ही सकल मान लेते हैं। वास्तव में विकास असंपृक्त द्वीपीय प्रयास नहीं है; यह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में बढ़त लेने हेतु सघन उद्यम की निरन्तरता है। इसमें प्रतियोगियों की क्षमताओं और निर्बलताओं को समझने का नैदानिक (क्लिनिकल) तरीका रखना पड़ता है और उसको दृष्टिगत करते हुए अपनी जयी रणनीति रचनी पड़ती है। दूसरी तरफ, अपनी क्षमताओं की परख और वृद्धि के लिए प्रयास वैसे ही होना चाहिए जैसा कि युद्ध के लिए होता है। यह युद्ध ही है और अपरिहार्य है। यहाँ तटस्थता नाम की नीति पराजय की स्वीकार्यता है। विकल्प मात्र यही हैं; जीतो और दुनिया पर राज करो अथवा हारो और दुनिया की चाकरी करो। इस युद्ध में जय उन देशों की होती है जिसके नागरिक शिक्षित, सजग, सक्रिय और निष्ठावान होते हैं, और प्रत्येक घटक उद्देश्यपरक, कुशल, और सक्षम। उक्त विषय सभी के लिए और विशेष कर बुद्धिवृत्तिकों के लिए उनके समस्त सरोकारों में सर्वोपरि होना चाहिए लेकिन उनमें से अपवादों को छोड़कर सभी शुतुरमुर्ग बने हुए हैं।

नीरज कुमार झा 

रविवार, 12 मई 2024

बौद्धिक वृत्ति कौशल

परिस्थितियों को लेकर उद्वेग, हर्ष अथवा विषादपूर्ण, बौद्धिक (लोकाचार बौद्धिकता) वृत्ति कौशल का परिचायक नहीं है। अधिकतर बुद्धिवृत्तिक यह नहीं जानते हैं कि उनके समान अन्य वृत्तिक का विचार उनसे  विपरीत क्यों है, यदि वे  किसी परिघटना से असन्तुष्ट हैं तो उसमें उस विचारधारा का क्या योगदान है जिसका वे परिवर्द्धन कर रहे हैं, यदि वे किसी परिघटना से संतुष्ट हैं तो वह परिघटना आगे क्या मोड़ लेने वाली है, विशिष्ट परिस्थिति और उनसे निःसृत विचारों की पृष्ठभूमि क्या है, और तमाम सामाजिक और वैचारिक विभाजनों का न्यायपूर्ण व सर्वहितकारी समाधान क्या है? यदि बुद्धिवृत्तिक क्षणिक परिस्थतियों में उलझे हुए  भावावेग में है तो वे गलत वृत्ति में हैं। बुद्धिजीवी का धर्म निर्लिप्त भाव से सर्वमंगल हेतु बुद्धि प्रयोग है। 

नीरज कुमार झा