नीरज कुमार झा
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शनिवार, 5 अक्टूबर 2024
भाषा चातुर्य और मर्मज्ञता
भाषा चातुर्य और मर्मज्ञता दो भिन्न परिघटनाएँ हैं और आवश्यक नहीं कि कोई व्यक्ति दोनों से युक्त हो। भाषाई व्यूह से असंपृक्त रहते हुए प्रासंगिक मंगलकारी तथ्यों का बोध प्राप्त करना भी गहन शिक्षा से ही संभव है। यहाँ यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि शिक्षा व्यक्ति के स्वयं का प्रयास है। जो व्यक्ति सीखने से विमुख है, उसका मार्गदर्शन कोई गुरु नहीं कर सकते।
नीरज कुमार झा
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