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नीरज कुमार झा
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मंगलवार, 30 जुलाई 2024
आभासी आपण
जीने के लिए संघर्ष करते लोग
सबसे बड़े बाजार हैं
फ़साने-तमाशों के
वे खरीदते हैं
खून-पसीने की कमाई से
आभासी उपलब्धियाँ और गौरव
उनका अपना कुछ नहीं होता
देखते सपने भी किराए से
नीरज कुमार झा
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