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मंगलवार, 19 अप्रैल 2022

समस्या-मुग्धता

समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या बहुतायत में लोगों का समस्या-मुग्ध होना है। अधिकतर समस्याओं का निदान, समाधान, या शमन संभव है। मेरा यह अवलोकन है कि जिनके विचार और व्यवहार के कारण समस्या उत्पन्न हुई है, वे ही अपनी कृत के उत्पाद से अनभिज्ञ समस्या को लेकर सबसे अधिक आंदोलित होते हैं। और, यह भी मैंने अकसर देखा है कि जो समाधान है उसका भी लोग विरोध करते हैं, विशेषकर वही लोग। यह अजीब सी नियति है, लोग समस्या का भी विरोध करते हैं और उसके समाधान का भी। शायद यह दासता की दीर्घावधि का परिणाम है कि समस्याओं की न्यूनता की स्थिति हमें असहज कर देती है। इससे भी बड़ी त्रासदी यह है कि समाधान के नाम पर समस्या-वर्धक युक्तियों को ही वरीयता दी जाती है। उदाहरण के लिए एक विदेशी मूल के अर्थशास्त्री ने पाठशालाओं को भोजशालाओं में बदलने की वकालत की और उसे मान भी लिया गया। परिणाम: न माया मिली न राम। अब उसी धारा के अनुयायी शिक्षा के स्तर को लेकर रूदन कर रहे हैं।

नीरज कुमार झा

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