नीरज कुमार झा
गुरुवार, 26 मार्च 2026
ज्ञान : कतिपय स्पष्टीकरण
ज्ञान तभी ज्ञान है, जब उसे धारण किया जाए; यह भंडारण हेतु मात्र वस्तु नहीं है। ज्ञान आचरण में परिलक्षित प्रवृत्तियाँ हैं; सम्प्रेषण की निपुणता ज्ञान-अज्ञान से निरपेक्ष एक कौशल है। ज्ञान संवेदना और सौंदर्यबोध है; यह प्रभुता, धन या यश की प्राप्ति की युक्ति नहीं है। ज्ञान पीड़ा, वंचना, निरर्थकता, नीरसता, अन्याय और संघर्षों के शमन हेतु विज्ञान का संधान है; यह अन्यीकरण की योजना के द्वारा शोषण, दोहन और परपीड़न का उपक्रम नहीं है। ज्ञान, सहानुभूति और स्वानुभूति की क्षमता है; नाटकीय प्रदर्शन या मंचन में दक्षता इसके इतर एक कला है।
नीरज कुमार झा
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