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शुक्रवार, 20 मार्च 2015

तुम ही ज्ञान हो तुम ही अंधकार हो

कोई इतना भी बड़ा नहीं हो सकता
कि तुमसे बड़ा हो जाए
कोई इतना भी छोटा नहीं हो सकता
कि तुमसे छोटा हो जाए
तुम नहीं जानते कि तुम क्या हो
तुम सब कुछ हो
और तुम कुछ भी नहीं हो
तुम ही ब्रह्माण्ड हो
तुम ही हो कण लघु
तुम ही आदि हो
तुम ही अनादि हो
तुम अंत हो
तुम ही अनंत हो
तुम ही सीमा तुम ही असीम हो
तुम ही आकार तुम ही निराकार हो
तुम ही भंगुर तुम ही सनातन हो
अस्तित्व का यह अगम अगोचर अज्ञेय विस्तार
है तुम्हारा ही विराट रूप
यह सृष्टि भी तुम ही हो
तुम्हारे ही साथ यह उत्पन्न
और तुम्हारे साथ ही हो जाएगी यह नष्ट
तुम नष्ट भी नहीं होते
तुम अजन्मा भी हो
इसलिए यह सब कुछ भी वैसा ही है
नश्वर ही शाश्वत है
शाश्वत ही नश्वर है
तुम नश्वरता में हो शाश्वत
और हो शाश्वत नश्वर भी
तुम सब कुछ समझते भी हो
और कुछ भी नहीं समझते
तुम ही ज्ञान हो तुम ही अंधकार हो

- नीरज कुमार झा

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