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शनिवार, 29 अगस्त 2015

सबसे पहले तुम व्यक्ति हो

सबसे पहले
तुम व्यक्ति हो
तुम मानवता हो
बाद में हो तुम और कुछ
जैसे हैं सभी
तुम्हें नहीं जरूरत रक्षा की
या रक्षकों की
तुम हो ही नहीं कमज़ोर
तुम्हें सिर्फ़ ऐसा बताया गया है
यह एक षड्यंत्र है
तुम्हें सरपरस्ती में रखने के लिए
तुम्हें तुम्हारी मानवीयता से वंचित करने के लिए
वे तुम्हें हर कुछ के रूप में रखना चाहते हैं
सिवाय उसके जो तुम हो
एक व्यक्ति, एक मानव
तुम भी हो वही गीता वाली आत्मा
जिसका कुछ नहीं हो सकता
शरीर संरचना भी अलग नहीं
यह है मात्र परस्पर पूरकता
कलंक से इसका कोई सम्बन्ध नहीं
समझो
वैसा कुछ भी नहीं है
जैसा तुम्हें महसूस होता है
ये बनाए गए साचें हैं सिर्फ़  
तुम फोड़ सकती हो सारे  साचों  को
प्रार्थना है तुमसे
मत बने रहो तुम रणक्षेत्र
उठो मिट्टी से
बनो तुम अग्रिम योद्धा
अनीति-अन्याय के विरूद्ध
चल रहा आदिम संघर्ष
कर रहा है इंतजार तुम्हारा
युगों से

नीरज कुमार झा

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