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गुरुवार, 3 जून 2010

शहर के पुल


शहर पटा पुलों से
आवाजाही भी बहुत पुलों पर
शहर को बाँटते नदी-नाले
पता भी नहीं पड़ते
नदी-नाले पता तो नहीं पड़ते
लेकिन इस गुमनाम आवाजाही से
पता भी क्या पड़ता है
आते-जाते हैं लोग
पता उनका भी नहीं पड़ता
शहर है बड़ा
दरारें हैं चौड़ी
पर पता नहीं चलता
पुल पड़े हैं पाटों पर
जोड़ते नहीं किनारों को
बार-बार पार होते हैं लोग
लेकिन पार नहीं हो पाते लोग
पता उसका भी नहीं चलता

- नीरज कुमार झा

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